Raika's

रेबारी, रायका, देवासी, देसाई या गोपालक के नामसे जानी जाती यह जनजाति राजपूत जातिमे से उतर आई है! ऐसा कंई विद्वानो का मानना है!

हर जाति की उत्पत्ति के बारे में अलग अलग राय होती है वैसे ही इस जाति के बारे मे भी कई मान्यताए है!

इस जाति के बारे मे पौराणिक बात यह कही जाती है कि भगवान शिवजी ने अपने ऊट (Camel) की देखभाल के लिए एक आदमी का सर्जन किया वोही पहला रेबारी था! उनकी चार बेटी हुई, शिवजी ने उनका विवाह राजपूत (क्षत्रीय) जाती के पुरुषो के साथ किया! और उनकी संतती हुई वो हिमालय के नियम के बहार हुई थी इ लीये वो राहबरी या रेबारी के नामसे जानी जाने लगी! ओर आज उसे राईका, देसाई, देवासी, धनगर, पाल, हीरावंशी, कुरुकुरबा, कुरमा, कुरबरु, गडरिया, गाडरी, गडेरी, गद्दी, बधेल के नाम से लोग जानते है!

Camel

पौराणिक बातो मे जोभी हो, किंतु ईस जातिका मूल वतन एशिया मायनोर होगा की जहासे आर्य भारत भूमि मे आये थे! आर्य का मुख्य व्यवसाय पशुपालन था ओर रेबारी का मुख्य व्यवसाय आजभी पशुपालन ही है! इसी लिये यह अनुमान लगाया जाता है कि आर्यो के साथ यह जाती भारतमें आयी होगी!

रेबारी जाति हिन्दु देव-देवीओंकी उपासक जाति है! धर्म और संस्कार मजबूत चट्टानकी तरह है! हर रेबारीके गांवो के नेस(Area) में कोइ न कोई धर्मस्थान होते है! कोम की एकता इनसे ही तो है! अपने धर्मस्थानो के महंत, गुरूश्री का बहुत सन्मान करते है, उनकी दिखाई राह पर त्यौहार, शादी-ब्याह करते है!

यह जाति पूरे भारत में है! लेकीन गुजरात और राजस्थान मे इनकी जन संख्या अधिक है!