Vadwal Temple - Dudhrej

रेबारी कौम हिन्दु देव-देवीओकी उपासक कोम है! धर्म,संस्कार मजबुत होता है! रबारीके गांवो के नेस(Area)मे कोइन कोई धर्मस्थान होते है! संप ईसीलीये तो है! जहां धर्म कार्य होते है, देव देवीकी स्थापना होती है ऐसी जगहको मंदिर, जगागुरूद्वार, गुरूदरबारके नाम से पहचाना जाता है! भारतभरमे ऐसी कई जगह है! ईस जगह(मंदिर)का प्रशासन रेबारी समाज के द्वारा पसंद कीये संत, महंत या पीढीयों से चले आते साधु करते है! ऐसे स्थान पर साधु, संत रहते है! जिनको इस कोम अपना धर्मगुरू मानकर इनके दिखाये राह पर रीतरिवाजो का पालन करते है! हर रेबारीको अपने संत के प्रति अटल श्रध्धा होती है!

Vadwala Temple - Dudhai

अपनी दुरंदेशी बुध्धिसे सदीयों पहेले रेबारी जातीने समाजके आश्रमरूप मंदिर बनाए, जीसमे अपने समाजके अपंग और अनाथ लोगो को रखते है! मंदिरमे वह लोग धार्मिक शिक्षण और क्रियाकांडसे साधु बनते है! आज का अनाथ कल का संत बनकर पू.महंतश्री की पदवी पाकर ईस समाज के मंदिरमे धर्मगुरू की गद्दी पर बेठते है और इस जाती ऊनकी चरनरज अपने माथे पे लगाते है!

और हां, ईस अनाथ आश्रम रूप मंदिरो के कारण ईतने बडे समाज में कोईभी व्यक्ति रास्ते पे भीख मांगता हुआ नही दिखाई देता!

रेबारीओकी संस्थाके आराध्य देव श्रीराम, श्रीकृष्ण, श्रीनाथजी, श्रीनकलंग देव होते है! मुस्लिम शासन के वक्त धर्म बचाने के लिए खातिर कुछ रेबारी संस्थाओने पीराणा धर्म दाखिल करना पडा! फीर भी वह हिन्दु और पीराणा दोनो के रीतरिवाज पालते है!

रेबारी धर्मस्थानो के लिये संतो, सेवको फंड लेने के लिए नीकलते है! जो देना जरूरी माना जाता है! कुछ सालोमें इक बार महंतश्री फंडके लिये निकलते और सब लोग उन्हे दिल से सत्कारते है व दान-दक्षिणा देते है!