रेबारी ज्ञातिकी मूल शाखो (SURNAME) और गौण शाखो (SUB SURNAME)
पौराणिक दंतकथा के अनुसार भगवान शिवजी ने अपने ऊट (Camel) की देखभाल के लिए एक समला के वृक्षके छीलकेसे आदमी का सर्जन किया वोही पहला रेबारी था! समला का वृक्ष के नाम परसे भगवान शिवने उनका नाम या शाख (Surname) सांबोड रख्खी! उनकी चार बेटी हुई, शिवजी ने उनके विवाह राजपूत (क्षत्रीय) जाती के पुरुषो के साथ किये! और शिवजीने उन्हे अपने पास रख्खे! बादमे उनका वंश बढा और जीस बेटी जो राजपूत के साथ ब्याही गई थी उनके बालको की शाख वही राजपुतो की शाख अनुसार रख्खी गई (मकवाणा, राठोड, सोलंकी, परमार)!
इन राजपूत शाखो मे से ज्यों ज्यों रेबारी ज्ञातिका वंश बढने लगा त्यों त्यो वो स्थलातर करने लगे और गांवोके नाम परसे या दूसरी कई वजहसे रेबारीकी शाखाओ मे से कई पेटा शाखाए बढती गई! बाद हालमां कुल 133 गौण शाखाए हुई है! ईसी लिए तो रेबारी समाजको 'वीसोतेर नात' के नाम से जानी जाती है! वीसोतेर मतलब बीस + सो + तैराह (20+100+13=133)
विसोतेर रेबारी समाजकी कुल 133 गौण शाख इस तरह है!
कटारिया, कबोतरा, काछोळ, काछेला, कानकटा, कारसिया, काबोर, केड, कुकोह, कुंभार, कोमरा, कोला,
खडोर, खटाणा, खांभल्या, खार, खारवाणिय,
गरछोळ,
घरमरीया, घाटिया, घाटेतेर, घांघवा, घांघोड, घाटरिया, घांघारिया, घेलोचर, घेळोत्तर,
चरमटा, चरकटा, चमरिया, चावडा, चानबीडा, चेलाणा, चौहाण,
जादव, जाजाळा, जेठा, जेह, जेठवा, जोटाणा,
झियोड,
टलुका, टभारिया,
डाभी, डिया,
ढघोल, ढेंचवा, ढेचोतर, ढोकरीया,
दांकीया, देव, दोदळा, देवरा, देवरिया,
नागोर, नावोर, नांदवा, नांदलिया, नेह,
पना, परमार, परवरिया, पदवाडा, पढार, पाटवाळ, पूंछल्या,
बल्या, बारेच, बोरड, बार, बुचोतर,
भडस्मा, भारई, भाठी, भाटरीया, भुंगोळा, भूख्या, भूंभळिया, भुंदरे, भुंड, भेजा, भोकुं,
मकवाणा, मारू,मेर, मेह, मोटण, मोरडाव, मोरी, मोटुं,
रन्जया, रज्या, राजीया, राठोडा, रांणवा, रूवारा, रूणेचा, रूडेया, रोहिया, रोझिया,
लव, ललुतरा, लळतुका, लूणी, लोढा, लोह, लोक,
वणोतरा, वातमा, वाघेया, वेजोल, वेगडोर,
शिलोरा, शेठा,शेखा,
सवघोर, सावधरीया, सांबोळ, सेवाळ, सेधिया, सोलंकी,
हडियोल, हाथोल, हुचोल, हूण,
अचवा, अजोणा, अवछारिया, आल, आंबोघरा, आबोचर, ईहोर, उमोट, उजोडा, उलवा,
मुल 133 शाख मे से अपभ्रंश हो के, गांवो या प्रदेश के नाम से अभी नई शाखो अस्तीत्वमे आई है वो यह है!
करड, ढगल, खांभला, देसाई, मर्या, करमटा, टरमटा, टमालीया, हरण, पढेरीया, कलोत्रा, नांघा, भाडका, कोडीयातर, बगैरह!
इसके अलावा कोई शाख हो जो यहां पर ना हो, कृपया हमे बताये हम उन्हे यहां शामिल करेंगे!
